उन्ही जालों में फ़सा,
जिन्हे मैनें बुना था;
जिसे मै दुनिया समझा,
वो मेरा अपना बनाया वहम था;
अब तो बस अपनी खोज बाकी रह गयी है;
मैने कहीं खुद ही सुना,
जो मैने बोला था;
और फिर साफ़ करके,
मेरी अपनी फ़ैलायी हुयी धुन्ध,
मैने देखा मैं खुद को घूर रहा था;
खुद से दूर करके अपने को,
मै खुद के पास आता हूं,
अन्त तैयार करता हूं,
फिर सुरूवात बनाता हूं;
मै ही खुदा था, मै ही खूदा हूं,
खुद को तलाशता हूं:
- प्रद्युम्न
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